प्रयागराज में फर्जी आधार कार्ड गिरोह का पर्दाफाश: ATS और यूपी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
प्रयागराज में यूपी एटीएस (ATS) और साइबर क्राइम पुलिस की टीम ने एक बड़े साइबर अपराध का खुलासा करते हुए फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के सुरक्षा तंत्र को हैक और बायपास कर अवैध रूप से आधार डेटा में हेरफेर कर रहा था।
प्रमुख बिंदु और गिरफ्तारी
पुलिस और एटीएस की संयुक्त टीम ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है:
- लवकुश यादव (निवासी: प्रतापगढ़) – गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड
- परमात्मा शरण उर्फ विवेक (निवासी: फतेहपुर)
- विवेक त्रिपाठी
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार राज्य के अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं।
काम करने का तरीका (Modus Operandi)
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह गैंग काफी हाई-टेक तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था:
- सुरक्षा बायपास और क्लोनिंग: आरोपी रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर (जैसे Anydesk, TeamViewer) और बायोमेट्रिक क्लोनिंग तकनीकों की मदद से UIDAI के सर्वर सुरक्षा ढांचे को बायपास करते थे।
- अनधिकृत एक्सेस: गिरोह अधिकृत आधार ऑपरेटरों की लॉगिन आईडी और पिन (PIN) का गलत इस्तेमाल कर बिना अनुमति के सिस्टम में प्रवेश करता था।
- अवैध वसूली:
- एक सेशन के लिए ऑपरेटर आईडी एक्टिवेट करने के एवज में ₹5,000 लिए जाते थे।
- प्रति नया आधार कार्ड बनाने या क्रेडेंशियल्स अपडेट करने के लिए ₹250 से ₹500 तक की वसूली की जाती थी।
बरामद सामग्री
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से बड़े पैमाने पर तकनीकी उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए हैं:
- लैपटॉप और हाई-स्पीड हार्ड ड्राइव / SSDs
- बायोमेट्रिक और फिंगरप्रिंट स्कैनर
- मोबाइल फोन और फर्जी सिम कार्ड
- बैंक पासबुक, चेकबुक और अन्य संदिग्ध दस्तावेज
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और आधार अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए कितने फर्जी आधार कार्ड बनाए गए और क्या इनका इस्तेमाल किसी देशविरोधी या वित्तीय धोखाधड़ी में किया गया है।







